सीखने का जज़्बा

ये कहानी अहमद नामी एक छोटे से ग़रीब बच्चे की है !
अहमद का संबंध एक गरीब परिवार से था। वह सड़कों पर कूड़ा चुनता और इस से अपना जीवन यापन करता था। उसके पास न अच्छे कपड़े थे, न ही खाने की उचित सुविधा, और सबसे बड़कर, शिक्षा का कोई साधन नहीं था।

SEEKHNE KA JAZBA 
सीखने का जज़्बा



एक दिन, उसे कूड़े में एक पुरानी किताब मिली। अहमद को पढ़ना नहीं आता था, मगर वह किताब को संभाल कर रख लिया। हर रोज, वह दूसरों से शब्दों का अर्थ पूछता और धीरे-धीरे खुद पढ़ना सीखने लगा। वह जहां भी कोई टूटी-फूटी किताब देखता, उसे उठा लेता और उससे ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करता। 

यह सफर आसान नहीं थी। कई बार वह भूखा सोता, कई बार लोग उस पर हंसते, मगर वह अपने सपने से पीछे नहीं हटा। वह दिन-रात मेहनत करता रहा, यहां तक कि उसने खुद को इतना काबिल बना लिया कि स्कॉलरशिप हासिल कर ली। कई साल बाद, वही कूड़ा चुनने वाला बच्चा एक सफल बिज़निस मेन बन गया। 

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जब एक इंटरव्यू में उससे पूछा गया कि "आपको सबसे बड़ी प्रेरणा कहां से मिली?" तो अहमद ने मुस्कराकर जवाब दिया: "वह किताबें जो दूसरों के लिए कूड़ा थीं, मेरे लिए सफलता का रास्ता बन गईं!"

सबक़ 

यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर आप में सीखने का जज़्बा हो और आप अपने सपने को हकीकत बनाने के लिए मेहनत करें, तो दुनिया की कोई रुकावट आपको नहीं रोक सकती।