मास्टर मकबूल ने नादिया की जिंदगी को जहन्नम बना रखा था। वह अलग-अलग तरीकों से उसे परेशान करता रहता था। आखिर एक दिन नादिया ने तंग आकर उसके खिलाफ एक संगीन कदम उठाने का फैसला कर लिया। कॉलेज से छुट्टी के बाद वह अपना रजिस्टर और नोटबुक लेकर बाहर निकली और एक रिक्शे में सवार हुई। रिक्शे वाले को पुराने कब्रिस्तान की दूसरी तरफ पुरानी बस्ती का पता बताया। रिक्शेवाले ने हैरानी से नादिया की तरफ देखा, क्योंकि वह जानता था कि कब्रिस्तान की दूसरी तरफ जो लोग रहते हैं, वे ठीक लोग नहीं हैं। लेकिन वह खामोश हो गया और रिक्शे को लेकर उस पुरानी बस्ती वाले इलाके की तरफ चला गया।
KHATARNAAK KHEL - FIFTH EPISODE
कब्रिस्तान की दूसरी तरफ कुछ मकान थे और एक तरफ एक पान-सिगरेट की दुकान थी। नादिया ने उसे कादर बख्श के बारे में पूछा, पहले तो दुकानदार ने बारीकी से नादिया को सर से पांव तक जायजा लिया, फिर दुकान के पीछे की तरफ से एक लड़के को आवाज दी कि जाओ इस बीबी को कादर बख्श के पास छोड़ आओ। वह 10 साल का लड़का नादिया को लेकर कादर बख्श के मकान की तरफ चल पड़ा। दरवाजे के पास ही उस लड़के ने नादिया को छोड़ दिया और वापस चला गया। नादिया ने दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से एक 40 साल का आदमी बाहर निकला। नादिया ने उसे बताया कि शार्क ने मुझे आपका पता और नाम बताया था, इसलिए मैं एक जरूरी काम से आपके पास आई हूं। शार्क का नाम सुनकर कादर बख्श अलर्ट हो गया और फौरन दरवाजे से पीछे हट गया और नादिया को अंदर आने के लिए कहा। जब नादिया अंदर आई, तो उसने फौरन दरवाजा बंद कर दिया और नादिया को एक बोसीदा से कमरे में ले गया और उसे बैठने के लिए कहा। नादिया ने हाथ में पकड़े हुए अपना रजिस्टर और कापियां एक तरफ रख दीं। तेज गर्मी की वजह से उसे पसीना आ रहा था और प्यास से गला भी सूख रहा था।
कादर बख्श ने तुरंत ठंडे पानी का गिलास नादिया को पिलाया, जो नादिया ने एक ही सांस में पी लिया। कादर बख्श ने नादिया से पूछा, "जी बीबी जी, बताइए किस काम से आना हुआ? शार्क साहब हमारे जिगरी दोस्त हैं, यारों के यार हैं। आपका जो भी काम होगा, हम वह कर देंगे।"
नादिया ने उसे बताया कि कैसे मास्टर मकबूल उसे रोज-रोज तंग कर रहा है और कैसे वह उससे अपनी जान छुड़ाना चाहती है। उसने मास्टर मकबूल के सभी गंदे कारनामों को खोलकर कादर बख्श के सामने रख दिया। कादर बख्श गहरी सोच में डूब गया। थोड़ी देर के बाद उसने नादिया को यकीन दिलाया कि आप चिंता न करें, आगे से वह आपको तंग नहीं करेगा, बल्कि वह इस इलाके में भी नजर नहीं आएगा।
अभी वे बैठे यह बातें ही कर रहे थे कि एक लड़का दौड़ता हुआ आया और दरवाजे पर दस्तक दी। कादर बख्श तुरंत उठा दरवाजे पर गया। आने वाले लड़के ने उसे बताया कि उस्ताद , पुलिस का छापा पड़ गया है, जल्दी से यहां से निकल जाएं, वे आपको ढूंढ रहे हैं। कादर बख्श तेजी से वापस पलटा, कमरे में आया और नादिया को बताया कि यहां पुलिस का छापा पड़ चुका है, जल्दी से यहां से निकल जाओ, नहीं तो पुलिस वाले आपको भी धर लेंगे। यह कहकर कादर बख्श दीवार फ्लांग करके दूसरी तरफ कूद गया।
नादिया इस स्थिति से घबरा गई कि अगर वह इस जगह पर पुलिस के हाथ लग जाती तो फिर उसका बचना मुश्किल था और पुलिस तरह-तरह के सवाल करकर उसकी जिंदगी अजीरन कर देती। नादिया तुरंत वहां से उठी और तेजी से चलती हुई मकान के पीछे की तरफ गई। वहां की दीवार थोड़ी छोटी थी और उसके पीछे कब्रिस्तान का इलाका था। नादिया किसी तरह वह दीवार फ्लांग करके दूसरी तरफ उतर गई और तेज-तेज कदम बढ़ाते हुए कब्रिस्तान वाली पगडंडी पर चलना शुरू कर दिया।
इसी घबराहट के आलम में उसका पैर मुड़ गया और वह नीचे गिर गई। लेकिन वहां रुकना खतरे में डाल सकता था, इसलिए नादिया तुरंत उठी और तेज-तेज कदम चलती हुई कब्रिस्तान से निकलकर दूसरी तरफ पहुंच गई, जहां पर गाड़ियों की वर्कशॉप की दुकानें थीं। एक दुकानदार ने इस जल्दी में नादिया को कब्रिस्तान से बाहर आते देखा, तो वह समझ गया कि यह औरत कादर बख्श के अड्डे से निकलकर इधर आ रही है, क्योंकि आए दिन कादर बख्श के अड्डे पर पुलिस के छापे पड़ते रहते थे।
वह औरत तेजी से सड़क पर आई, वह घबराई हुई थी और उसकी चाल में भी लंगड़ाहट थी। वर्कशॉप वाले ने उस लड़की को बैठने के लिए एक कुर्सी दी और पानी का गिलास दिया। नादिया ने जल्दी से पानी का गिलास खत्म किया और दुकानदार से कहा कि जितनी जल्दी हो सके, मुझे एक रिक्शा मंगवा दें ताकि मैं अपने घर जा सकूं। वर्कशॉप वाला एक नेकदिल इंसान था, उसने अपने लड़के को दौड़ाया जो रिक्शा ले आया। नादिया रिक्शे में बैठी और अपने घर की तरफ रवाना हो गई।
नादिया एक नई मुसीबत में फंस चुकी थी। जैसे घर पहुंची, उसका जिस्म थर-थर कांप रहा था। वह आते ही चारपाई पर ढेर हो गई और फूट-फूट कर रोने लगी। वह सोचने लगी: कादर बख्श के पास जाने का उसका फैसला गलत था, उसे जाना ही नहीं चाहिए था। उसे अंदाजा नहीं था कि वहां पर पुलिस का छापा पड़ सकता है। अगर वह पुलिस के हाथ लग जाती तो जाने कितनी बदनामी होती। यह सोचकर वह और फूट-फूट कर रोने लगी, लेकिन अब क्या हो सकता था। जो होना था, वह तो हो चुका था।
अचानक एक ख्याल ने उसके रोंगटे खड़े कर दिए। उसके पास जो रजिस्टर था, वह जल्दी में वहीं कादर बख्श के मकान में छोड़ आई थी। अगर वह पुलिस के हाथ लग जाता तो रजिस्टर में उसका नाम और कॉलेज का नाम लिखा हुआ था, और पुलिस फ़ौरन नादिया तक पहुंच सकती थी। यह सोचकर वह इतनी घबराई कि अपने होश खो बैठी और सारी रात इस तरह रो-रो कर गुजार दी। अगले दिन उसे सख्त बुखार हो गया, जिसकी वजह से वह कॉलेज ना जा सकी। लगभग 3 बजे कॉलेज का एक चपरासी उसके घर आया, दरवाजे पर दस्तक दी।
नादिया हर आहट पर घबरा जाती थी। आखिर उसने हिम्मत कर के दरवाजा खोला, तो कॉलेज का मुलाजिम रहमत सामने खड़ा था। नादिया ने उसे अंदर बुला लिया और पूछा कि वह किस काम से आया है? रहमत ने बताया कि आप आज कॉलेज नहीं आईं, तो मैडम ने कहा कि आपका पता करूं। नादिया ने रहमत से पूछा कि इसके अलावा तो कोई बात नहीं है ना? रहमत ने कहा, नहीं जी, कोई भी बात नहीं है। बस आपका रजिस्टर मैडम मंगवा रही थीं। अगर आप वह मुझे दे दें, तो मैं उन्हें लेकर वापस कॉलेज चला जाऊंगा।
रजिस्टर का नाम सुनकर नादिया के होश उड़ गए। वह घबरा गई और घबराहट में उसके मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। आखिर उसने हिम्मत कर के रहमत को बताया कि रजिस्टर एक सहेली के घर भूल आई है। कल कॉलेज आते हुए वह साथ ले आएगी। इसके बाद रहमत वहां से चला गया और नादिया फूट फूट कर रोने लागी !
अगले दिन डरते-डरते नादिया कॉलेज पहुंची और अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हो गई। लगभग 11 बजे के बाद अचानक एक मुलाजिम स्टाफ रूम में नादिया को बुलाने आया कि उसे प्रिंसिपल मैडम बुला रही हैं। नादिया उसके पीछे-पीछे प्रिंसिपल ऑफिस तक गईं और दरवाजे पर दस्तक देकर अंदर गईं, तो सामने बैठे दो पुलिस अफसरों को देखकर उसका खून सूख गया।
लेकिन जल्द ही नादिया ने अपने होश पर काबू पा लिया। प्रिंसिपल मैडम ने नादिया को कुर्सी पर बैठने के लिए कहा और इसके बाद नादिया की हालत का बारीकी से जायजा लेते हुए कहा कि ये दो पुलिस अफसर आपसे कुछ पूछना चाहते हैं और देखो हमारे कॉलेज की इज्जत का सवाल है, जो भी मामला है उसे जल्द से जल्द निपटा लो। यह कहकर प्रिंसिपल मैडम अपने ऑफिस से बाहर चली गईं। इनमें से एक पुलिस अफसर नादिया से मुखातिब हुआ। उसके हाथ में नादिया का रजिस्टर था, जिस पर उसका नाम और कॉलेज का पता लिखा हुआ था।
इंस्पेक्टर ने कहा, मैडम नादिया, यह रजिस्टर हमें एक चरस विक्रेता कादर बख्श के घर से मिला है, जहां पर पुलिस ने छापा मारा था, लेकिन वह फरार हो गया। अब आप यह बताएं कि आपका यह रजिस्टर उस घर में क्या कर रहा था। नादिया का चेहरा शांत था, क्योंकि उसे पता था कि ऐसे हालात आ सकते हैं। इसलिए वह शांत हो गई और ऐसा जवाब दिया जिसे सुनकर पुलिस वाले भी हैरान रह गए। नादिया ने बताया कि जब वह कॉलेज से वापस जा रही थी, तो जिस रिक्शे में वह बैठी थी, यह रजिस्टर वह उस रिक्शे में भूल गई थी और हो सकता है कि जिसका नाम आप लोग बता रहे हैं, यह उसका रिक्शा हो और वह व्यक्ति इसे अपने घर ले गया हो। नादिया ने आगे कहा कि वह कल से इस रजिस्टर के खोने पर बहुत परेशान थी। आपकी बहुत मेहरबानी होगी अगर आप यह रजिस्टर मुझे वापस कर दें, तो मैं इसे अपने रोजमर्रा के कामों को दर्ज कर लूंगी।
दोनों पुलिस अफसरों ने एक-दूसरे की तरफ देखा, वे समझ गए कि हो सकता है ऐसा ही हुआ हो, क्योंकि कादर बख्श के घर पर अक्सर रिक्शेवाले आते-जाते रहते थे, क्योंकि कादर बख्श लोगों को रिक्शे किराए पर देता था। हो सकता है किसी रिक्शे में उसका रजिस्टर रह गया हो और वह रिक्शा कादर बख्श के घर तक पहुंचा हो, तो वह रजिस्टर कादर बख्श के घर में ही रह गया हो।
पुलिस वाले वहां से चले गए और नादिया वापस स्टाफ रूम में चली गई। कॉलेज से वापसी पर उसने अपने लिए कुछ फल और कुछ सब्जियां खरीदीं और वापस अपने घर पहुंच गई। घर आकर उसने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया कि वक्त पर उसकी अक्लमंदी की वजह से वह एक बड़ी मुसीबत से बाहर निकल आई थी। नहीं तो पुलिस वाले तो बाल की खाल नोच लेते हैं। उसने अपने लिए ताज़ा जूस बनाया, इसके बाद उसके दिल और दिमाग को सुकून महसूस हुआ। दो दिन और गुजर गए, अब मास्टर मकबूल की तरफ से किसी भी तरह की कोई हरकत या बदतमीजी सामने नहीं आई थी, बल्कि वह खुद भी सामने नहीं आया था।
जब भी शार्क का ख्याल आता, तो वह फ़ौरन उसे अपने दिमाग से झटक देती थी। क्योंकि उसकी वजह से वह एक बड़ी मुश्किल में फंसते-फंसते बच गई थी। जब वह उसके घर आया था, तब भी उसकी बदनामी हो सकती थी और जब वह शार्क के कहने पर कादर बख्श के पास मदद के लिए गई थी, तो पुलिस का छापा पड़ने की वजह से उसकी इज्जत मिट्टी में मिल सकती थी। लेकिन इन सभी हालातों से नादिया ने बड़े अच्छे तरीके से मुकाबला किया था।
एक दिन पड़ोसियों में से एक औरत उसके घर आई, जिसकी जुबानी पता चला कि दो दिन पहले पुलिस को मास्टर मकबूल की तशद्दुद शुदा लाश मिली है। किसी ने बड़ी बेरहमी के साथ उसके दोनों हाथ पैर तोड़ दिए थे, जिसकी वजह से वह मारा गया था। इस औरत की बात सुनकर नादिया के रोंगटे खड़े हो गए, वह परेशान हो गई कि कहीं कोई नई मुसीबत उसके गले न पड़ जाए। इस औरत के चले जाने के बाद वह देर तक सोचती रही कि यकीनन कादर बख्श ने यह बात शार्क तक पहुंचा दी थी और शार्क ने ही यह कारनामा अंजाम दिया होगा। उसे यकीन था कि मेरे कादर बख्श के घर से फरार होने का वाकया भी शार्क तक पहुंच चुका होगा। उसे डर था कि कहीं शार्क फिर उसके घर न आ धमके।
अंत में वही हुआ जिसका नादिया को डर था। उस रात 11 बजे जब वह सोने की तैयारी कर रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई। जब वह दरवाजे पर गई और दरवाजा खोला, तो शर्क दरवाजा धकेलता हुआ अंदर आया। नादिया उसके अंदर आने से घबरा गई। लेकिन शार्क ने उसे कमरे में चलने को कहा। जब दोनों कमरे में पहुंचे, तो शार्क कुर्सी पर बैठ गया और नादिया को चारपाई पर बैठने का इशारा किया।
शार्क को कादर बख्श की जुबानी पूरी घटना का इल्म हो चुका था, लेकिन वह नादिया की जुबानी सुनना चाहता था। नादिया ने मास्टर मकबूल से लेकर कादर बख्श के घर छापा पड़ने तक और फिर वहां से कब्रिस्तान के रास्ते घर पहुंचने तक की पूरी दास्तान शार्क को सुनाई। इसके साथ ही कॉलेज में दो पुलिस अफसरों के आने और उससे सवाल करने वाला मामला भी शार्क के कानों में डाल दिया। साथ ही उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। उसने शार्क से कहा: खुदा के वास्ते मेरी इज्जत का ख्याल करें, मैं बहुत बुरी तरह से फंस गई हूं और इस परेशानी ने मेरी रातों की नींद हराम कर दी है।
शार्क ने उसे तस्सली दी कि अब तुम्हें कोई परेशान नहीं करेगा। बातों ही बातों में नादिया ने महसूस किया कि शार्क नजरें झुकाकर उससे बात कर रहा था। शार्क की यह अदा नादिया को बहुत पसंद आई। वह मुजरिम था और न जाने किन हालातों से गुजरा था। लेकिन उसकी परवरिश किसी अच्छी मां ने की थी। अंत में नादिया ने उसे पूछ ही लिया कि वह एक अच्छा इंसान है और ऐसे हालातों का शिकार कैसे हुआ? तो शार्क ने अपने ऊपर बीती पूरी दास्तान नादिया को सुनाई। शर्क की दास्तान सुनकर नादिया की आंखों में आंसू आ गए कि एक ऐसा बच्चा जिसे उसके मां-बाप के कत्ल के इल्जाम में 10 साल जेल की हवा खानी पड़ी, उस पर क्या बीती होगी।
एक बज रहा था, नादिया ने चाय बनाई, खुद भी पी और शार्क को भी पिलाई। शार्क ने उसे तस्सली दी कि आज के बाद वह दोबारा उसकी तरफ नहीं आएगा और कोशिश करेगा कि उसकी तरफ कोई भी गलत निगाह न डाले या उसकी इज्जत पर कोई उंगली न उठाए, वह उसे खुद निपट लेगा। इतना कहकर शार्क वहां से उठ गया और तारीक गली में उसका अस्तित्व गायब हो गया। नादिया देर तक अपनी चारपाई पर बैठी शार्क को सोचती रही। शार्क के चले जाने के साथ ही उसके दिल में एक अजीब सी हलचल मच गई थी। अंत में उसने धड़कते दिल को थाम लिया और न चाहते हुए भी नींद की वादियों में खो गई।
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