खतरनाक खेल-छटा और आखरी एपिसोड


शार्क ने छिपकर रहना जारी रखा था। वह सुल्तान अकबर के निर्देशों का पालन कर रहा था, क्योंकि वह उस समय पुलिस के साथ मामलों को सुलझाने में व्यस्त था। जैसे ही पुलिस के साथ मामले सुलझ जाते, शार्क सार्वजनिक रूप से आ सकता था। दूसरी ओर, नादिया भी अपने रोज़ मर्रा के कामों मे व्यस्त थी। उसके खयालों में शार्क बस गया था और अनजाने में उसका प्यार नादिया के दिल में घर कर चुका था।

खतरनाक खेल-छटा और आखरी एपिसोड  

खतरनाक खेल-छटा और आखरी एपिसोड


एक तीसरी आंख जो शार्क और नादिया पर नजर रखे हुए थी, वह थी माझा गुज्जर की खतरनाक आंख। माझा गुज्जर बदले की आग में जल रहा था। उसने शार्क की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने विशेष गुंडों को तैनात किया था। आखिरी बार माझा गुज्जर के लोगों ने शार्क को नादिया के घर जाते देखा था। जब इस बात की जानकारी माझा गुज्जर को दी गई, तो उसने सोचा कि अभी शार्क को ढील दूंगा , अभी शार्क और उससे जुड़े हर व्यक्ति को मौत के घाट उतार दूंगा । माझा गुज्जर ने शार्क को फंसाने के लिए एक नया प्लान बनाया।


उसने अपने विशेष आदमी फ़िरदौस से कहा कि उस लड़की के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करे। वह कौन है? वह क्या करती है? वह कहां-कहां आती-जाती है? अगर हम उस लड़की को उठा लेते हैं तो शार्क खुद चलकर हमारे पास आएगा। फिर शार्क के सामने उसके प्रियजनों को मौत के घाट उतारकर मैं अपने भाई की हत्या का बदला लूंगा। इस तरह मेरे दिल में ठंडक पड़ जाएगी।


फ़िरदौस ने कुछ लोगों के साथ नादिया के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दिया और माझा गुज्जर को सभी जानकारियों से आगाह किया । माझा गुज्जर ने नादिया को अगवा करने का प्लान बना लिया।


यह एक तूफानी रात थी, जिसमें बारिश हो सकती थी। कभी-कभी आसमान पर बिजली चमकती थी और थोड़ी देर के लिए रोशनी फैल जाती थी, फिर हर तरफ अंधेरा छा जाता था।
अचानक, कुछ नकाबपोश उस गली में घुस गए, जहां नादिया का घर था। नादिया सभी बातों से बेखबर अपने घर में चारपाई पर लेटी हुई थी, जो शार्क के बारे में सोच रही थी। वह शार्क से मिलना चाहती थी, ताकि वह उसे अपने बारे में बता सके और शार्क के बारे में जान सके कि वह कहां है।


नादिया शार्क के बारे में चिंतित भी थी, क्योंकि शार्क जिस रास्ते पर चल रहा था, उस पर केवल मौत ही मिल सकती थी। नादिया सोच रही थी कि अगर वह शार्क से मिलकर उसे समझाए कि वह इस बुराई के रास्ते से हट जाए और एक अच्छे इंसान की जिंदगी बसर करे, तो वे दोनों मिलकर एक अच्छा भविष्य बना सकते हैं।


नादिया इन्हीं विचारों में गुम थी कि अचानक उसके कानों में एक धमाके की आवाज पड़ी, जैसे कोई इंसान दीवार फांदकर अंदर कूदता है। नादिया ने इसे अपना वहम समझा और बिस्तर पर लेटी अपने विचारों में गुम सोचती रही।


नादिया की लापरवाही के कारण, नकाबपोश उसके घर में घुस चुके थे। वे धीरे-धीरे कमरे के दरवाजे के पास पहुंचे। कमरे में झांककर देखा तो एक सुंदर लड़की बिस्तर पर लेटी थी, लेकिन उसकी आंखें खुली हुई थीं।


दो नकाबपोश घर में घुस चुके थे, और तीन नकाबपोश बाहर गलियों में छिपे बैठे थे। घर में घुसने वाले दो नकाबपोशों में से एक के पास तेज़ धार वाला खंजर था, और दूसरे ने अपनी कमर के साथ एक पिस्तौल उड़स रखा था।


खंजर लिए नकाबपोश ने दरवाजे को धकेलते हुए कमरे में प्रवेश किया और आते ही नादिया के मुंह पर हाथ रख दिया, ताकि वह चिल्ला न सके।


नादिया उस आफत से डर गई। पहले तो वह समझी कि शायद शार्क आया है, लेकिन शार्क ऐसा व्यवहार नहीं कर सकता था। यह कोई और था।


जब उसकी नज़र उस नकाबपोश पर पड़ी, वह चिल्लाना चाहती थी, लेकिन नकाबपोश ने उसके मुंह पर इतनी जोर से हाथ रखा था कि वह चिल्ला नहीं सकी और चीख उसके गले में अटक कर रह गई।


दूसरे नकाबपोश ने नादिया की कनपटी पर पिस्तौल रखा और उसे चुप रहने के लिए कहा। नादिया समझ गई कि अगर वह चिल्लाती है, तो ये लोग उसका काम तमाम कर देंगे। इसलिए वह चुप हो गई।


खंजर लिए नकाबपोश ने नादिया के मुंह पर एक रुमाल रखा और थोड़ी ही देर के बाद नादिया बेहोशी की हालत में चली गई। उनमें से एक नकाबपोश ने नादिया को अपने कंधों पर उठा लिया और तेजी से कमरे से बाहर निकल आए। बाहर का दरवाजा खोलकर झांककर देखा तो गली खाली और सुनसान थी। लेकिन उनके साथी बाहर मौजूद थे। बाहर छिपे हुए तीनों बदमाश एक जीप में सवार थे। उन्होंने जीप दरवाजे के सामने रोकी और नादिया को जीप में डाला और फ़ौरन उस गली से फ़रार हो गए।


काफी दिनों से शार्क छिपा हुआ था। उसका दिल चाहता था कि वह नादिया से जाकर मिले, लेकिन सुल्तान अकबर की हिदायत के मुताबिक वह यह कदम नहीं उठा सकता था। क्योंकि जब तक पुलिस से मामले तय नहीं हो जाते, शार्क बाहर नहीं निकल सकता था।


आखिरकार एक दिन सुल्तान अकबर ने शार्क को बताया कि पुलिस के साथ मामले तय हो चुके हैं और कुछ पैसों के लेन-देन और दो-तीन गिरफ्तारियों के बाद मामला रफ़ा दफ़ा कर दिया गया है। इसके बाद शार्क मंज़रे आम पर आ सकता था।


लेकिन अभी भी उसे सावधानी की जरूरत थी। क्योंकि माझा गुज्जर कहीं छिपकर बैठा था और जख्मी शेर की तरह कभी भी खतरनाक हमला कर सकता था। इसलिए शार्क को पुलिस से कोई फिक्र नहीं थी, लेकिन माझा गुज्जर की तरफ से किसी भी तरह का हमला हो सकता था।


आखिर एक रात शार्क का सब्र जवाब दे गया। उसने नादिया के घर जाने का फैसला किया। रात 10 बजे का समय था। वह पैदल चलते हुए बाजार से गुजर रहा था और एक चौक पर पहुंच गया। वहां उसे एक रिक्शा मिल गया। रिक्शा खाली था और उसका ड्राइवर पान-सिगरेट की दुकान से सिगरेट खरीद रहा था। शार्क ने उससे पूछा कि क्या वह चलने के लिए तैयार है? रिक्शा ड्राइवर तुरंत रिक्शे में बैठ गया और शार्क की बताई हुई मंजिल की ओर चल दिया।


थोड़ी देर के बाद, शार्क उस गली में पहुंच गया जहां नादिया का घर था। रिक्शेवाला वापस चला गया और गली के अंत में जब शार्क नादिया के घर के सामने पहुंचा, तो उसने एक बड़ा ताला देखकर अपना चेहरा उदास कर लिया। वह परेशान हो गया कि रात के इस समय नादिया कहां जा सकती है? लेकिन फिर उसके दिल में यह विचार आया कि शायद वह कॉलेज से छुट्टियां लेकर अपने माता-पिता से मिलने गई होगी। यह सोचकर उदास और परेशान दिल लिए वह वापस मुड़ आया और सुल्तान अकबर के डेरे पर पहुंचकर अभी बैठा ही था कि एक आदमी उसके पास आया और उसे बताया कि एक बुरी खबर है - माझा गुज्जर मन्जर आम पर आ गया है और आपके लिए एक सूचना है। यह आदमी भी सुल्तान अकबर का विशेष सेवक था। उसने एक नंबर शार्क को बताया कि इस नंबर पर आप संपर्क करें - माझा गुज्जर आपसे बात करना चाहता है।


शार्क को यह बात समझ में नहीं आई कि माझा गुज्जर अचानक से कहां से आया है। लेकिन वह जानता था कि अब एक खतरनाक खेल शुरू होने वाला है। जीवन और मृत्यु के इस खेल में शार्क पहले से ही शामिल था।
शार्क ने माझा गुज्जर से बात की और उसे बताया कि वह अपने माता-पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। माझा गुज्जर ने हंसकर बताया कि अब कुछ ही घंटे बचे हैं और जल्द ही शार्क और उसके प्यारों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा।


शार्क को यह नहीं पता था कि माझा गुज्जर उसके प्यारों में किस की बात कर रहा है। लेकिन जब माझा गुज्जर ने नादिया का नाम लिया, तो शार्क का दिल धड़कने लगा। वह जानता था कि नादिया बेकसूर है और उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।


शार्क ने माझा गुज्जर से कहा कि अगर उसे बदला लेना है, तो वह सामने आकर लड़े। नादिया को सम्मान के साथ छोड़ दें और उसे वहीं पहुंचा दें जहां से उसे उठाया गया है। अगर नादिया को कोई नुकसान पहुंचाया गया, तो शार्क जान ले लेगा, और माझा गुज्जर के हाथों को टुकड़े-टुकड़े कर दूगां।


माज़हा गुज्जर ने एक और हंसी ली और शार्क से कहा, "मेरी कुछ मांगें हैं अगर तुम उन्हें पूरा करोगे तो नादिया को कुछ नहीं कहा जाएगा, उसकी इज्जत भी सुरक्षित रहेगी और उसे वापस उसके घर पहुंचा दिया जाएगा। मेरी पहली मांग यह है कि तुम खुद को मेरे हवाले कर दो, दूसरी मांग यह है कि मेरे इलाके से तुम और सुल्तान अकबर निकल जाओ, वहां मैं अपना चरस का कारोबार करूंगा। अगर मेरी ये शर्तें मंजूर हैं तो मैं नादिया को रिहा कर दूंगा और उसके घर पहुंचा दूंगा। अगर नहीं, तो फिर मौत के इस भयानक खेल में खून खराबा भी होगा और इज्जत की धज्जियां भी उड़ेंगी।"


शार्क शेर की तरह गरजा, लेकिन माझा गुज्जर ने कहा, "शार्क बाऊ, अभी तुम गुस्से में हो, इसलिए ठंडे दिमाग से सोचो और मुझे आगाह कर देना।" यह कहकर माझा गुज्जर ने फोन बंद कर दिया। शार्क गहरी सोच में पड़ गया। वह नादिया को लेकर बहुत परेशान हो रहा था। उसे पता था कि इस मासूम लड़की का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, वह बेचारी ऐसे ही अपनी इज्जत गंवा बैठेगी या जान से जाएगी। लेकिन शार्क नादिया को बचाने की हर संभव कोशिश कर सकता था। उसने फ़ौरन सुल्तान अकबर से संपर्क किया और सारी स्थिति उसे बताई। सुल्तान अकबर ने कहा, "अच्छी बात है कि माझा गुज्जर मैदान में आ गया है, अब जल्द ही उसे भी ठिकाने लगा दिया जाएगा और उसका पूरा गिरोह खत्म कर दिया जाएगा और इस इलाके से उसका नाम-निशान भी मिटा दिया जाएगा। लेकिन मुश्किल यह है कि नादिया उसके कब्जे में है, नादिया को भी बचाना है और माझा गुज्जर को भी सजा दिलानी है। इसके लिए हमें अच्छी तरह से योजना बनानी होगी, ऐसा प्लान बनाना होगा जिसमें सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।"


शार्क ने सुल्तान अकबर की बात सुनने के बाद जवाब दिया, "हमारे पास प्लान बनाने का समय बिल्कुल नहीं है। इससे पहले कि माझा गुज्जर कोई नई चाल चले, हमें आज रात उसके अड्डे को ढूंढना होगा और आज ही रात उसका किस्सा खत्म करना होगा।"


सुल्तान अकबर ने शार्क के चेहरे का गहराई से जायजा लिया। शार्क की आंखें अंगारे बरसा रही थीं। सुल्तान अकबर समझ गया कि उसके दिल में अपने माता-पिता के हत्यारे के लिए अत्यधिक नफरत है।


सुल्तान अकबर ने अपने आदमियों को हिदायतें दे दी। सुल्तान अकबर का नेटवर्क पूरे इलाके में फैला हुआ था। इसलिए उसके आदमी उस इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे। सुल्तान अकबर की हिदायतों के बाद उसके आदमी पूरे इलाके में फैल गए और माझा गुज्जर के अड्डे की जानकारी इकट्ठा करने लगे।


रात के तीन बज चुके थे। शार्क और सुल्तान अकबर बैठे अपने आदमियों की इकट्ठा की गई जानकारी और माझा गुज्जर के बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारी का विश्लेषण कर रहे थे। लेकिन अभी तक माझा गुज्जर के अड्डे के बारे में कोई जानकारी नहीं आई थी।


अंत में, सुल्तान अकबर के पास एक आदमी का फोन आया। उसने अपने शक का इज़हार किया कि कुछ संदिग्ध प्रकार की गतिविधियां एक हवेली नुमा घर में देखी गई हैं और हो सकता है कि वहां पर माझा गुज्जर अपने साथियों के साथ मौजूद हो।


सुल्तान अकबर ने उस आदमी को पूरी जानकारी लेने का कहा। उस आदमी ने थोड़ी देर के बाद फिर फोन करके इस बात की जानकारी दी कि माझा गुज्जर अपने आदमियों के साथ उस हवेली में मौजूद है। वह हवेली माझा गुज्जर के एक पुराने दोस्त की थी जो कि कुछ समय से विदेश में रहता था।


शार्क और सुल्तान अकबर अपने कुछ आदमियों के साथ माझा गुज्जर के उस नए अड्डे पर पहुंच गए। दूर से ही गाड़ियों की लाइट्स ऑफ कर दी गईं और उनके इंजन बंद कर दिए गए। सुल्तान अकबर और शार्क ने अपनी-अपनी राइफलें संभाल लीं और अपने साथियों के साथ पैदल ही उस हवेली की ओर बढ़ने लगे।


बाहर से ऐसा लगता था जैसे हवेली में कोई भी मौजूद नहीं है। लेकिन थोड़े इंतजार के बाद उन्हें हवेली के अंदर कुछ हलचल महसूस हुई। कुछ आदमी उस हवेली के सामने वाले दरवाजे से कुछ दूर खुफिया तरीके से छुपकर बैठ गए और कुछ लोग उस हवेली के पीछे की तरफ दीवार फांदकर अंदर घुसने का प्रोग्राम बना रहे थे।


शार्क उन आदमियों के साथ हवेली के पीछे के दरवाजे की तरफ गया, जहां पर दीवार फांदकर वे अंदर घुस सकते थे, और सुल्तान अकबर अपने कुछ लोगों के साथ हवेली के सामने वाले दरवाजे के सामने मौजूद कुछ पेड़ों की आड़ लेकर पोजीशन संभालकर बैठ गए, क्योंकि अगर इस दरवाजे से माझा गुज्जर और उसके साथी भागने की कोशिश करते तो उन्हें मौत की नींद सुलाया जा सकता था।


इस कार्रवाई में केवल एक घंटा लगा। शार्क और उसके साथियों ने हवेली में घुसकर वहां मौजूद सभी लोगों को मौत के घाट उतार दिया। उस समय उस हवेली में माझा गुज्जर के साथ चार-पांच साथी मौजूद थे, जिन पर कब्जा पाना बहुत आसान था। माझा गुज्जर गंभीर रूप से घायल हो चुका था और एक तहखाने से नादिया से नदिया मिली !


शार्क नादिया को लेकर तुरंत वहां से वापस आ गया, जबकि सुल्तान अकबर वहीं रहा। सुल्तान अकबर ने वहां मौजूद सभी लोगों की लाशों को और माझ गुज्जर को मारने के बाद उसी हवेली के अंदर गड्ढा खोदकर दफन कर दिया और पूरी हवेली को आग लगा दी। सुबह फज्र की अजान के समय वह पूरी हवेली आग के शोलों की लपेट में थी।


शार्क ने अपने साथियों को डेरे पर जाने के लिए कहा और खुद नादिया को लेकर उसके घर की तरफ चल पड़ा। घर के दरवाजे पर अभी भी ताला लगा हुआ था। नादिया ने पड़ोसी के दरवाजे पर दस्तक दी, उस समय सुबह की रोशनी निकल चुकी थी। पड़ोसी ने नादिया को अंदर बुला लिया और खफा होने लगी कि भला कोई इस तरह अपना दरवाजा खुला छोड़कर कहीं जाता है? आजकल के चोर अचके घर से सारा सामान ले उड़ते हैं।


नादिया ने उस पड़ोसी औरत का शुक्रिया अदा किया और चाबी लेकर वापस आ गई। घर का दरवाजा खोला और शार्क के साथ घर में घुस गई।


नादिया की हालत बहुत खराब थी। नादिया ने शार्क से कहा, "मैं आपके लिए चाय बनाती हूं।" लेकिन शार्क ने कहा, "नहीं, मैं चलता हूं। अपना ख्याल रखें।" नादिया ने बहुत जोर दिया, लेकिन शार्क बाद में मिलने का कहकर उसके घर से चला गया।


नादिया ने अपना हुलिया ठीक किया, नहाकर ताज़ा-ताज़ा होकर अपने लिए चाय बनाई। नाश्ता किया और एक हफ्ते के बाद दोबारा कॉलेज चली गई। कॉलेज से छुट्टी के बाद जब नादिया वापस घर जाने लगी, तो उसे शार्क नजर आया, जो कॉलेज के बाहर उसका इंतजार कर रहा था। उसने शार्क को देखकर खुशी से हाथ हिलाया और उसकी तरफ बढ़ गई। शार्क उसे लेकर एक पास के रेस्टरों में गया, जहां उन्होंने बहुत सारी बातें की और दोपहर का खाना भी खाया।


नादिया ने शार्क को उस रास्ते से हटने और एक अच्छे भविष्य की तरफ बढ़ने के लिए बहुत सारी बातें समझाईं, लेकिन शार्क ने कहा, "मैं जिस रास्ते पर हूं, उस पर वापसी का कोई रास्ता नहीं है। अपने दिल से यह ख्याल निकाल दो। मैं भी तुम्हें पसंद करता हूं, लेकिन जीवन का साथी नहीं बन सकता। कभी भी पुलिस की गोली मुझे मौत की नींद सुला सकती है। मैं सारी जिंदगी भागता रहूंगा। किसी एक जगह पर नहीं बैठ सकता।"


ये बातें सुनकर नादिया का दिल उदास हो गया। वह जानती थी कि शार्क कठिन रास्तों का मुसाफिर है। नादिया के पास दो ही विकल्प थे: या तो वह सब कुछ छोड़कर उसके साथ चल देती या फिर अपनी जिंदगी अलग बना लेती। नादिया और शार्क ने अपनी-अपनी जिंदगी के रास्तों पर चलने का फैसला किया। शार्क अपनी दुनिया में वापस लौट गया और नादिया अपनी आम जिंदगी में वापस आ गई।


कुछ दिनों के बाद वह वापस अपने माता-पिता के घर चली गई। उसके माता-पिता ने उसकी शादी कर दी। उसके पति के रेफरेंस से ही उसका तबादला दूसरे शहर में हो गया। नादिया अक्सर जब कभी अकेली बैठती, तो शार्क के बारे में सोचती कि शार्क कहां होगा? किस हालत में होगा? जिंदा भी होगा या पुलिस की किसी अंधी गोली ने उसे मौत की नींद सुला दिया होगा