शफ़ाअत अली के माता-पिता 1965 की जंग में शहीद हो गए थे। खेत-खलिहान और अपना सब कुछ लुटाकर वह अपनी जान बचाता हुआ एक अस्पताल पहुंचा था। तब शेर मुहम्मद ने उसे अपने घर में पनाह दी थी और अपना बेटा बना लिया था। शफ़ाअतअली जवानी को पहुंचा तो शेर मुहम्मद ने अपनी भानजी सकीना से उसकी शादी कर दी। फिर सकीना ने जब एक खूबसूरत बच्चे को जन्म दिया तो उसका नाम शार्क रखा गया।
शार्क बहुत किस्मत वाला था। जब वह पैदा हुआ तो उसके पिता शफ़ात अली की फल की छोटी सी दुकान चमक उठी और अच्छी आमदनी आनी शुरू हो गई। शफ़ात अली ने वह दुकान खरीद ली और काम बढ़ा लिया, लेकिन साथ ही एक मुसीबत उनके गले पड़ गई। उनके मोहल्ले में एक वकील था जिसने चालबाजी से जाली कागजात बना लिए और दुकान के असली मालिक होने का दावा कर दिया। लेकिन उसकी चालबाजी खुलकर सामने आ गई और सलमान नामी वकील हार गया, लेकिन दिल में बदला लेने की ठान ली
शफ़ात अली का बेटा शार्क बारह साल का हो चुका था। वह सुर्ख और सफेद रंग का गोल-मटोल प्यारा सा बच्चा था। अल्लाह ने उसे बहुत होशियारी दी थी। पढ़ाई के साथ-साथ पिता के साथ कारोबार भी देखता था।
वह सर्दियों का मौसम था, बारिशें शुरू हो चुकी थीं। आसमान काले बादलों से ढका हुआ था। शफ़ाअत अली ने दुकान बंद की और बेटे के साथ घर चला गया। रात बारह बजे के लगभाग वह सोने के लिए लेट गए। कुछ देर बाद शफ़ाअत अली को लगा कि बाहर कोई है, क्योंकि उसने धब-धब की आवाज सुनी थी। वह दरवाजा खोलकर बाहर आ गया। बाहर घनी तारीकी थी और बारिश भी हो रही थी। वह आगे बढ़ना चाहता था कि एक नकाबपोश ने राइफल का बट इतनी जोर से मारा कि उसकी चीख निकल गई। एक और साया दीवार की आड़ से निकलकर सामने आ गया, उसके हाथ में खंजर था। उसने खंजर का भरपूर वार किया और खंजर दस्ते तक शफ़ाअत के सीने में पेवस्त हो गया। उसकी मुंह से निकलने वाली दूसरी चीख पहली से ज्यादा खतरनाक थी। इसी लम्हे बादल गरजे, लेकिन कमरे में लेटी सकीना ने अपने पति की चीख सुन ली। वह नंगे पैर बाहर दौड़ी आई, दो नकाबपोश उसके पति पर हमला कर रहे थे। वह अपने पति को बचाने के लिए दौड़ी तो एक तीसरा नकाबपोश खंजर लेकर दीवार की आड़ से निकला और सकीना के पहलू में खंजर से वार किया। अपने जख्मों की परवाह किए बिना वह पति की तरफ लिपटी। दोनों मियां-बीवी चीखते रहे और हमलावर खंजरों और राइफल के बट से उन पर हमले करते रहे। उनकी चीखें बादलों की घन गरज में दब गईं।
शार्क चीखों की आवाज सुनकर उठ गया था। वह भी कमरे से निकलकर बाहर दौड़ा, बाहर का मंजर देखकर वह डर से सहम गया, लेकिन वह डरने की बजाय अपने माता-पिता की मदद के लिए दौड़ा, लेकिन एक हमलावर ने उसे इतनी जोरदार ठोकर मारी कि वह चीखता हुआ दूर पानी में जा गिरा। एक हमलावर उसकी ओर लपका, लेकिन उसकी माँ ने जख्मों के बावजूद उस हमलावर का पैर पकड़ लिया। सकीना लगातार चीख-चीखकर शार्क को भाग जाने के लिए कह रही थी। शार्क को समझने में देर नहीं लगी कि इन हत्यारों के सामने वह अपने माता-पिता की मदद नहीं कर सकता।
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वह उठकर छत पर जाने वाली सीढ़ियों की ओर दौड़ा, बारिश और तेज हो गई। एक नकाबपोश ने चिल्लाकर कहा, "पकड़ो इस साले को, वह भाग रहा है!" एक हमलावर उसके पीछे दौड़ा, शार्क संभलकर छत की ओर दौड़ा, लेकिन पीछे आने वाला हमलावर बुरी तरह फिसला और नीचे जा गिरा, जब तक वह संभलकर वापस आया, शार्क दूर निकल गया। लड़के का भाग जाना उनके लिए खतरनाक था, वह इस दोहरे हत्याकांड का चश्मदीद गवाह था। उसके माता-पिता सकित हो चुके थे और हमलावर जा चुके थे, क्योंकि लड़का पूरा मोहल्ला इकट्ठा कर लेता तो उनका बचना मुश्किल हो जाता।
लेकिन शार्क उन्हें पहचान नहीं सकता था, क्योंकि उन्होंने नकाब से चेहरे छुपा रखे थे।
शार्क दूर छुपा सब देख रहा था, वह दूर नहीं गया था, बल्कि वापस लौटकर छुपकर बैठ गया था। जब वे निकल गए, तो शार्क छत से नीचे उतरा और अपनी माँ की लाश से लिपट गया, उसकी माँ के सीने में अभी तक खंजर प्योस्ट था। उसका पिता भी जख्मों से चूर-चूर होकर खत्म हो गया था। शार्क ने पूरी ताकत लगाकर खंजर अपनी माँ के सीने से निकाला, तो खून का फव्वारा फूट पड़ा।
वह माँ से लिपट गया और बेहोश हो गया। सुबह छह बजे बारिश बंद हो गई। शार्क जिस लड़के के साथ स्कूल जाता था, वह शार्क को साथ लेकर जाता था, उस दिन भी जब वह घर में दाखिल हुआ, तो आँगन में लाशें और खून देखकर चीखते हुए अपने घर दौड़ा, और अपने पिता को बताया, पूरे मोहल्ले में बात फैल गई और सब जमा हो गए।
देखा तो लड़का अभी भी जीवित था, उसे कोई जख्म नहीं था। उनमें सलमान वकील भी था, उसे मौका मिल गया और सबको बताने लगा कि यह लड़का बागी हो गया था और अपने माता-पिता से भी लड़ता रहता था, आज उसने अपने माता-पिता की हत्या कर दी । उसने पुलिस को भी कॉल कर दी, मामला उसके नियंत्रण में था, कोई भी मोहल्ले में इस मामले में नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए सबने ला इल्मी का इज़हार किया। सलमान ने पुलिस को सारी रुदाद सुना डाली, उसने कुछ और लोगों को भी अपने साथ शामिल कर लिया और बोला, "देखो, सब लड़के को होश में लाओ, उसके हाथ में खंजर है, उसी ने हत्या की है।
शार्क को होश आ गया था। पुलिस वाले उसे गिरफ्तार कर के ले गए। सभी सबूत उसके खिलाफ थे, इसलिए उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई। उसके पीछे पीछे भी वकील सलमान का हाथ था। वह उनकी दुकान और मकान हथियाना चाहता था। लेकिन अदालत ने मोहल्ले के एक इज़्ज़तदार आदमी सुल्तान को शार्क का सरपरस्त मुक़र्रर किया और दुकान और मकान उसकी निगरानी में दे दिया।
जेल में शार्क का रवैया, उसके खिलाफ गवाही की बयानों से बिल्कुल अलग था। सख्त गीर और संगदिल जेलर को भी शार्क की मासूमियत पर तरस आ गया था। उसकी जिंदगी जेल में बहुत सारे कैदियों के साथ गुजरी थी। जेल में आम चोर और जेबकतरों से लेकर खतरनाक डाकू और कातिल भी आते थे। कभी कभी किसी बेगुनाह को भी झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया जाता था। जेलर जेल में कैदियों की मनोविज्ञान से अच्छी तरह वाकिफ था, वह अच्छी तरह समझता था कि किसके साथ किस तरह का सलूक रखना चाहिए। अगरचे जेल में आने वाला हर दूसरा कैदी अपने आप को बेगुनाह कहता था, लेकिन जेलर उनकी शक्ल से ही अंदाजा लगा लेता था कि कौन झूठा और कौन सच्चा है।
शार्क ने जेल में आ कर कई दिनों तक जुबान नहीं खोली थी, वह अजीब सी नज़रों से कैदियों को देखता रहता था। न जाने क्यों जेलर को उससे हमदर्दी हो गई थी और जब शार्क ने जुबान खोली तो उसने अपने बारे में या अपने मां बाप के क़त्ल के बारे में एक लफ़्ज़ भी जुबान से नहीं निकाला था। जेलर ने शार्क से कोई मशकत का काम लेने की बजाय उसे दफ़्तर में चपरासी की हैसियत से रख लिया और जब शार्क ने पढ़ने लिखने में दिलचस्पी का इज़हार किया तो उसे किताबें भी मुहैया कर दीं।
जेल में आने के ढाई साल बाद शार्क ने मैट्रिक का इम्तिहान पास कर लिया, तो वह बहुत खुश था और जब उसका रिजल्ट जेलर ने देखा, तो उसे भी बहुत खुशी हुई। शार्क पर कभी-कभी अजीब सी कैफ़ियत तारी हो जाती, वह गुमसुम बैठा रहता और चेहरे पर अजीब से तासूरात उभरते। उसे अपनी आँखों के सामने खून ही खून फैला हुआ नजर आता। माँ-बाप के खून में लथपथ लाशें। जख्मों से चूर लाशें। दो-तीन नकाबपोश इधर-उधर भागते दिखाई देते। शार्क पर जब भी ऐसी कैफ़ियत तारी होती, उसका जिस्म पसीने से शराबोर हो जाता था, वह टकटकी लगाकर आसमान को घूरता रहता और उसकी आँखों में वीरानी होती, जिनमें बिल-आखिर आंसू उभर आते।
दिन हफ्तों में बदल गए, हफ्ते महीनों में और महीने बरसों में। शार्क ने जेल में ही बीए का इम्तिहान पास कर लिया, तो उसकी अच्छी चाल-चलन और हासिल की गई तालीम की वजह से शार्क को न केवल जेल में बहुत सारी सुविधाएँ मिल गईं थीं, बल्कि उसकी सजा भी कम हो गई थी। अब वह 22 साल का एक भरपूर जवान था। जब वह जेल में आया था, तो उसकी उम्र 12 साल थी। उसने जेल में 10 साल काटे थे।
कुछ अरसे से जेलर ने उसे अपने बंगले की ड्यूटी से हटाकर दोबारा जेल में बुला लिया था, यहाँ भी उससे हल्के-फुल्के काम लिए जाते थे। उस रोज वह दफ़्तर के सामने पौधों की क्यारियों को पानी दे रहा था कि एक पुलिस वाला उसके करीब आकर रुक गया और बोला, "शार्क, तुम्हें जेलर बुला रहे हैं।" शार्क ने पानी वाली बाल्टी एक तरफ रख दी और वार्डन के पीछे-पीछे चल पड़ा।
दफ्तर में पहुँचकर जेलर ने उससे कहा कि शार्क, तुम्हें यहाँ आए हुए कितना समय गुजर चुका है? तो शार्क ने बताया कि दस साल, एक महीना और 17 दिन। तो जेलर ने कहा कि आखिर तुम्हें अपने जुर्म का एहसास है? तो शार्क ने कहा कि मैंने तो कोई जुर्म ही नहीं किया था। कौन बेवकूफ अपने प्यारों को मौत के घाट उतार सकता है? मेरे माँ-बाप ही मेरा सब कुछ थे। मैंने तो बाप की उंगली पकड़कर चलना सीखा था। रास्तों की ऊंच-नीच को भी नहीं समझता था, भला उन्हें कैसे क़त्ल कर सकता था?
जेलर ने उससे बताया कि उसकी सजा पूरी हो गई है और अब वह घर जा सकता है। वह इस बात पर हैरान हुआ, लेकिन जेलर ने उससे समझाया कि सजा कम होने के पीछे तुम्हारे अच्छे चरित्र और अखलाक एक बहुत बड़ी वजह थी, इसलिए तुम्हें समय से पहले रिहा किया जा रहा है ताकि तुम अपनी जिंदगी शुरू कर सको।
शार्क जेल से निकला और सीधा अपने घर गया, जहाँ उसके माँ-बाप को क़त्ल किया गया था। वह रात उसके लिए भयानक रात थी और आज के दिन वह अपने इस वीरान घर के अंदर खड़ा था। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। उसने घर की सफाई करवाई और सारा सामान ठीक किया और घर को रहने के काबिल बनाया।
फिर वह साथ ही मोहल्ले में सुल्तान के घर गया, जिसे अदालत ने उसके घर और मकान का निगरानी अधिकारी बनाया था। घर के दरवाजे पर दस्तक देने के बाद एक औरत ने दरवाजा खोला। वह मरियम सुल्तान की पत्नी थी। मरियम सुल्तान के साथ एक-दो दफा जेल में शार्क से मिल चुकी थी, इसलिए उसने शार्क को पहचान लिया और अपने घर के अंदर ले गई। घर में उसकी जवान उम्र की बेटी रजिया ने चाय बनाई और फिर उसके बाद मरियम ने सारे हिसाब-किताब और चेकबुक और इसके अलावा जितने भी रुपये-पैसे का हिसाब था, वह शार्क को दे दिया।
शार्क हैरान हुआ कि इतनी ईमानदारी के साथ इन लोगों ने उसके मकान और दुकान को संभाल रखा था। शार्क कुछ देर वहाँ बैठा रहा और इसके बाद वहाँ से निकलकर अपने घर आया। घर के लिए कुछ जरूरी सामान और फर्नीचर खरीदने के बाद उसने घर को रहने के काबिल बना लिया। अब वह सोच रहा था कि कोई कारोबार शुरू करे क्योंकि उसके बैंक अकाउंट में दो लाख से ज्यादा की राशि मौजूद थी। वह वापस मरियम के घर आया और उससे मशवरा करने लगा कि क्या किया जाए। अचानक मोहल्ले में शोर उठा, शार्क दौड़कर बाहर आया तो क्या देखता है कि उसके घर में आग लगी हुई है और शोले उठ रहे हैं। तमाम सामान फर्नीचर जो नया लेकर आया था, वह जलकर राख हो गया। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह आग किसने लगाई है, लेकिन शार्क समझ गया था कि उसके दुश्मनों को पता चल चुका है कि वह घर आया है अब वह उसके ऊपर कातिलाना हमले भी करेंगे और उसे तंग भी करेंगे।
शार्क ने अपने मकान के जलने की रिपोर्ट थाने में लिखवा दी कि किसी ने उसके घर में आग लगा दी थी और मोहल्ले के कुछ लोग भी उसके साथ गए ताकि वह वहाँ पर गवाही दे सकें। थानेदार ने रिपोर्ट दर्ज कर ली और यकीन दिलाया कि जल्द ही मुजरिम को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शार्क वापस आया और उस रात वह अपने जले हुए मकान में मौजूद था और सोच रहा था कि अब जिंदगी को कैसे आगे ले जाना है किस तरह की जिंदगी और मौत के दरमियान वह अपने दुश्मनों के साथ बचके रहेगा या उनसे बदला लेगा। शार्क ने तय कर लिया कि वह अपने माँ-बाप के कातिलों को जरूर ढूंढेगा और एक इबरतनाक मौत देगा।
शार्क जब से मरियम के घर आ जा रहा था, मोहल्ले वालों ने अलग-अलग किस्म की बातें बनाना शुरू कर दीं कि घर में जवान लड़की है और गैर मर्द को घर बिठा रखा है, लेकिन मरियम ने किसी की बात की परवाह नहीं की। वह शार्क को अपना बेटा समझती थी और शार्क भी रजिया को अपनी बहन मानता था क्योंकि बचपन में वे एक साथ खेला करते थे। मरियम ने शार्क को मशवरा दिया कि जो दुकान किराए पर है, उस दुकान को वापस लेकर वहाँ कोई अपना कारोबार शुरू कर लेना चाहिए। शार्क को यह तजवीज़ बहुत पसंद आई और उसी दिन शार्क दुकान पर पहुँच गया। दुकान का मालिक एक सेहतमंद आदमी था और दुकान में अलग-अलग किस्म के फल अच्छे तरीके से सजे हुए थे। शार्क ने अपना परिचय कराया और उसे बताया कि अब वह खुद इस दुकान में कोई कारोबार करना चाहता है, इसलिए एक महीने के अंदर उसकी दुकान को खाली कर दे। उस आदमी ने हामी भर ली कि एक महीने के अंदर वह कोई और दुकान देख लेगा और उनकी दुकान खाली कर के दे देगा।
इसी दौरान एक आदमी उस दुकान पर आया और उसने कुछ पैसे दुकानदार की मुट्ठी में दिए और दुकानदार ने एक सफेद पुड़िया उसके हाथ में थमा दी और उसने फौरन जेब में डाल ली और वहाँ से चला गया। शार्क यह सारा मामला देख रहा था, लेकिन वह इस बात को समझ नहीं सका कि यह क्या हो रहा है। इसी तरह शार्क की मौजूदगी में दो-तीन लोग और भी आए और कुछ पैसे दुकानदार की मुट्ठी में थमाते और चोरी-चोरी कुछ पुड़िया जेब में डालकर चले जाते थे, लेकिन शार्क ने इस बात का नोटिस नहीं लिया और वापस घर आ गया।
इसी तरह समय गुजरता रहा और एक महीने के बाद जैसे ही दुकान खाली हुई, शार्क ने भी उस दुकान के अंदर फलों और अन्य चीजों का कारोबार शुरू कर दिया और एक दोस्त और जानने वाले की मदद से उसने अपनी दुकान सेट कर ली। लेकिन अभी कुछ दिन ही गुजरे थे कि फिर वही लोग आना शुरू हो गए जो कुछ पैसों के बदले कोई पुड़िया या अन्य चीजें लेना चाहते थे, लेकिन शार्क उन्हें डांटकर भगा देता था कि उसके पास किसी किस्म की कोई पुड़िया नहीं है।
शार्क की समझ में नहीं आ रहा था कि ये लोग किस पुड़िया की बात करते हैं। एक दिन उसकी दुकान के सामने एक खूब सूरत कार आकर रुकी जिसमें से दो तगड़े नौजवान बाहर निकले और शार्क की दुकान पर आए और उन्होंने कहा कि इस दुकान पर पहले जो आदमी काम करता था, वह हमारे साथ मिलकर काम करता था और हम उसे अच्छे पैसे देते थे। हमारे बहुत सारे कस्टमर इस दुकान पर आ रहे हैं, लेकिन तुम्हारे आने से कस्टमर परेशान हो रहे हैं इसलिए तुम्हें भी वही काम करना होगा जो पहले वाला आदमी करता था। शार्क परेशान हो गया कि वह पहले वाला आदमी क्या काम करता था। तो उन्होंने बताया कि सफेद पुड़िया बेचनी है। सुबह माल तुम्हें दे जाएंगे और शाम को तुम्हें डेरे पर पैसे जमा कराने होंगे। तुम्हें तुम्हारा कमीशन मिलता रहेगा।
शार्क गुस्से में आ गया और उसने समझ लिया कि ये लोग चरस या अफीम की बात कर रहे हैं जो कि एक नशा है। शार्क ने सख्ती से मना कर दिया कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा। वह आदमी चुपचाप वापस कार में चला गया।
कार में एक पहलवान नुमा इंसान बैठा हुआ था। उससे जाकर उसने बात की तो वह चुपचाप वहाँ से चले गए, लेकिन शार्क समझ गया कि मामला गड़बड़ है। शेरा पहलवान इस इलाके का नामी गिरामी बदमाश था। वह शार्क की दुकान पर गया और उसके आदमियों ने जब शार्क को पेशकश की कि वह अपनी दुकान पर उनका माल बेचे, लेकिन उसने इनकार कर दिया तो शेरा पहलवान उस समय वापस अपने डेरे पर चला गया, लेकिन उसने सोच लिया कि वह शार्क को सबक जरूर सिखाएगा और अपनी मर्जी का बन्दा इस दुकान पर बिठाएगा।
अगले दिन जब शार्क अपनी दुकान पर पहुँचा और कुछ कस्टमर्स को फल दे रहा था कि अचानक एक पुलिस की गाड़ी उसकी दुकान के सामने रुकी। इंस्पेक्टर तेजी के साथ दुकान में घुस गया और शार्क को गर्दन से पकड़कर काउंटर से नीचे उतार लिया और अपने मातहतों को कहा कि वे जाकर उसकी दुकान की तलाशी लें। इंस्पेक्टर ने घूरकर शार्क से कहा कि तुम यहाँ पर फलों के साथ-साथ चरस का धंधा करते हो और हमें खबर मिली है कि तुम्हारी दुकान में चरस मौजूद है।
इसी दौरान उसके मातहत चरस का एक बैग निकालकर लाए जो शायद उन्होंने खुद ही रखा था या अपने साथ लेकर आए थे। शार्क हैरान हो गया, और परेशानी की हालत में इंस्पेक्टर को बताने लगा कि उसने ऐसा कोई काम नहीं किया, न ही वह इस तरह की चरस या अफीम अपनी दुकान में बेचता है। वह तो सिर्फ फलों की एक दुकान है और उसके कस्टमर अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन इंस्पेक्टर उसकी बात मानने को तैयार नहीं था। वह घसीटता हुआ शार्क को अपने साथ ले गया थाने में शार्क को बंद कर दिया गया और शेरा पहलवान के कहने पर इंस्पेक्टर ने उस रात शार्क को बहुत मारा यहाँ तक कि उसका जिस्म लहू-लुहान हो गया।
शार्क अपने खौफ़नाक माज़ी को याद करते करते सो गया था। अब सोहेल ने रात के समय आकर उसे जगाया तो वह पसीने में शराबोर हो चुका था। सोहेल ने उसे कहा कि रात के नौ बज चुके हैं आप उठ जाएं और नीचे आकर खाना खा लें। शार्क उठकर बैठ गया और सोचने लगा कि उसका माजि कितना कर्बनाक था और किन किन लोगों ने उसकी जिंदगी को अजीरन बना दिया था।
शेरा पहलवान के कहने पर जब इंस्पेक्टर ने उसे फंसाकर गिरफ्तार किया तो उस समय मरियम उस इलाके के काउंसलर के पास गई और उसकी मिन्नत समाजत करने लगी। काउंसलर एक अच्छा आदमी था वह इंस्पेक्टर के पास गया और उसके कहने पर इंस्पेक्टर ने शार्क को छोड़ दिया। शार्क जख्मों से चुर था और उसके मुंह से भी खून बह रहा था। यह कुछ ऐसे हालात थे जिनमें शार्क बुरी तरह फंस चुका था। वह चरस के धंधे में नहीं पड़ना चाहता था। वह एक सादगी भरी जिंदगी गुज़ारना चाहता था, लेकिन ये लोग उसे इस फील्ड में फंसाना चाहते थे।
अगले दिन फिर शार्क अपनी दुकान पर गया और अपना रोजमर्रा का काम करने लगा। लेकिन फिर वही दो लोग आए और उससे कहा कि डेरे पर चलो शेरा पहलवान तुम्हें बुला रहा है। अब शार्क के पास और कोई हल नहीं था। वह उनके साथ वहाँ पर चला गया था। वहाँ पर जाकर शार्क को पता चला कि वह इस धंधे से बाहर नहीं निकल सकता। अगर वह उनका कहना नहीं मानेगा तो वह उसे तंग करते रहेंगे। शार्क ने सोच लिया कि वह इन लोगों के अंदर रहते हुए उन्हें खत्म करेगा और अपने माँ-बाप के कातिलों को भी ढूंढेगा। इस लिए उसने उनके साथ काम करने की हामी भर ली थी।
शार्क को उनके सरगना माझा गुज्जर से मिलवाया गया। माझा गुज्जर ने उसे समझाया कि हमारे धंधे में धोखा मत देना, अगर धोखा दोगे तो हम तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे और पूरी ईमानदारी के साथ काम करना। शाम को जितने भी पैसे कमाओ, डेरे पर जमा करा देना। शार्क चुपचाप वापस अपनी दुकान पर आ गया और सोचने लगा कि वह उनके साथ कैसे काम करेगा।
उसका इरादा मासूम लोगों की जान लेने का नहीं था, लेकिन इसके अलावा शार्क के पास और कोई हल नहीं था। शार्क ने सोच लिया कि वह उनके धंधे को खत्म करेगा इसलिए उसने एक जानने वाले से मिलकर उस इलाके के डीएसपी के साथ संपर्क किया और उस डीएसपी को सभी जानकारी प्रदान करने लगा और इस तरह डीएसपी ने शार्क की बताई हुई जगह पर उस रात छापा मारा था।
वह आधी जली हुई हवेली के अंदर सभी लोग तहखाने में मौजूद थे क्योंकि शार्क को तहखाने का पता नहीं था इसलिए वह छापा नाकाम हो गया था और वहाँ से शार्क बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर भागा था। शार्क उस समय अपने दोस्त सोहेल के होटल के ऊपर वाले खुफिया कमरे में मौजूद था और आने वाले दिनों के बारे में प्लानिंग कर रहा था।
शार्क ने सोचा कि सबसे पहले वकील सलमान के चारों ओर घेरा तंग करना चाहिए कि वह बता सकता है कि उस रात उसके माता-पिता को किसने मारा था। हो सकता है सलमान वकील सीधे तौर पर उसके माता-पिता के हत्या में शामिल हो। शार्क ने अपनी पूरी योजना बना ली थी वह न केवल अपने माता-पिता के हत्यारों को ढूंढने में लगा था, बल्कि उसका टकराव माझा गुज्जर से भी हो चुका था। माझा गुज्जर भी शार्क के खून का प्यासा हो चुका था क्योंकि शार्क माझा गुज्जर का करोड़ों का माल गायब कर चुका था।